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20 June, 2024, 07:00 AM
Eyes Care Tips: मोतियाबिंद की रोकथाम में बेहद असरदार हैं ये आयुर्वेदिक उपाय
मोतियाबिंद एक नेत्र विकार है जिसमें लेंस पर धुंधलापन आ जाता है। अगर ठीक से इलाज न किया जाए तो आंखों की रोशनी भी जा सकती है। आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में इसे ठीक करने के लिए सर्जरी का ऑप्शन है तो वहीं आयुर्वेद में लाइफस्टाइल में बदलाव हर्बल इलाज और पारंपरिक उपचार के जरिए मोतियाबिंद का उपचार संभव है। मोतियाबिंद को रोकथाम में आयुर्वेदिक तरीके साबित हो सकते हैं असरदार।
लेंस के धुंधलेपन को मोतियाबिंद कहा जाता है।
मोतियाबिंद की समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है।
आयुर्वेदिक तरीकों से मोतियाबिंद की रोकथाम है मुमकिन।
मोतियाबिंद भारत में बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है। डब्ल्यूएचओ और नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस (एनपीसीबी) द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि देश में 22 मिलियन से ज्यादा लोग दृष्टिहीन हैं, इनमें से 80.1% मामलों की वजह मोतियाबिंद है। सालभर में लगभग 3.8 मिलियन लोग मोतियाबिंद के कारण अंधे हो जाते हैं।
1. तेज गर्मी और ठंड से बचें
लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से आंखों में सूखापन और जलन हो सकती है, तो वहीं बहुत ज्यादा ठंड से ब्लड वेसेल्स सिकुड़ सकती है, जिससे आंखों में रक्त का प्रवाह कम हो सकता है। आंखों को सुरक्षित रखने के लिए धूप वाले चश्मे पहनें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और विटामिन ए से भरपूर चीजों का सेवन करें।
2. धूम्रपान न करें
धूम्रपान मोतियाबिंद को और गंभीर बना सकता है। तंबाकू के धुएं में शामिल जहरीले केमिकल्स आंखों के लेंस में मौजूद प्रोटीन को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे आंखों में धुंधलापन की समस्या हो सकती हैं।
3. ओवर-द-काउंटर दवाओं का उपयोग
लंबे समय तक स्टेरॉयड के इस्तेमाल उपयोग से भी मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता है। स्टेरॉयड आंख की लेंस संरचना में परिवर्तन का कारण बन सकता है, जो मोतियाबिंद के विकास को बढ़ावा देता है। आयुर्वेदिक चिकित्सक और डॉक्टर बिना सलाह के ऐसी दवाओं का उपयोग न करने की सलाह देते हैं।
4. नियमित जांच
मोतियाबिंद का शीघ्र पता लगाने और प्रबंधन के लिए नियमित आंखों की जांच बहुत जरूरी है। इससे आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या का समय रहते पता चल जाता है। जिससे समय पर इलाज कर उसे ठीक किया जा सकता है।
5. त्रिफला
त्रिफला, तीन फलों (आंवला, हरीतकी और बिभीतकी) से बना एक पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन है, जो अपने अनगिनत लाभों के लिए जाना जाता है। आंखों को धोने के लिए त्रिफला के पानी का उपयोग करने से आंखों को साफ करने और उनके स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। ऐसा माना जाता है कि इससे आंखों का इन्फेक्शन और दूसरी परेशानियां दूर रहती हैं और मोतियाबिंद का खतरा कम होता है।
6. तर्पण और अश्च्योतन कर्म
तर्पण और अश्च्योतन कर्म आयुर्वेदिक उपचार हैं, जो खासतौर से आंखों को स्वास्थ्य रखने का काम करते हैं। तर्पण में आंखों के चारों ओर औषधीय घी लगाना, पोषण प्रदान करना और दृष्टि में सुधार करना शामिल है। अश्च्योतन कर्म में आंखों को साफ करने और रोशनी बढ़ाने के लिए हर्बल आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल शामिल है। आंखों के ऑप्टीमल हेल्थ को बनाए रखने के लिए इन उपचारों को पालन करने को कहा जाता है।
Source:
https://www.jagran.com/lifestyle/health-ayurvedic-tips-to-deal-and-prevent-from-cataract-23742304.html




