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Stages Of Asthma: अस्थमा की बीमारी के होते हैं 4 स्टेज, जानिए कौन-सा स्टेज है कितना सीरियस

3 June, 2024, 11:01 AM

Stages Of Asthma: अस्थमा की बीमारी के होते हैं 4 स्टेज, जानिए कौन-सा स्टेज है कितना सीरियस

Various stages Of Asthma Diseases: अस्थमा या दमा फेफड़ों और श्वसन प्रणाली से जुड़ी एक समस्या है जिसमें मरीजों को सांस लेने में परेशानी, छाती में जकड़न, बलगम अधिक बनने और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।  यह एक क्रोनिक बीमारी है जो लम्बे समय तक बनी रह सकती है। अस्थमा में श्वसन नली में सूजन और सिकुड़न देखी जाती है। इससे मरीजों को ठीक तरीके से सांस लेने में समस्या आ सकती है।  इसीलिए, जब अस्थमा का अटैक आता है तो मरीजों की सांसे फूलने लगती है। अस्थमा के अटैक को मैनेज करने के लिए लोगों को पम्प की जरूरत पड़ती है।

अस्थमा की बीमारी किसी भी उम्र में देखी जाती है। अस्थमा के लक्षणों की गम्भीरता (severity of asthma symptoms) इस बात पर भी निर्भर होती है कि मरीज की बीमारी किस स्टेज पर है। आइए जानें अस्थमा के कितने स्टेज (Stages of Asthma) हैं और उनमें क्या लक्षण दिखायी देते हैं।

अस्थमा के कितने स्टेज होते हैं और अस्थमा ट्रिगर कैसे होता है? (Different stages Of Asthma)
अस्थमा के मरीजों की समस्याएं हवा,प्रदूषण, धूल-मिट्टी और स्मॉग जैसे कारणों से बढ़ सकती है। इससे लोगों को ठीक तरह से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। अस्थमा के अलग-अलग स्टेजेस में ये समस्याएं गम्भीर या कम गम्भीर हो सकती हैं

इंटरमिटेंट अस्थमा ( Intermittent Asthma)
अस्थमा की बीमारीका पहला स्टैज इंटरमिटेंट अस्थमा (Intermittent Asthma) कहा जाता है। पहले स्टेज में कई तरह के लक्षण दिखायी देते हैं। इस स्टेज में मरीज को 2-4 दिनों में कुछ लक्षण दिखायी देते हैं। हालांकि, इस स्टेज पर लक्षण हल्के होने के कारण लोगों को रात में ठीक तरह सो पाने में अधिक दिक्कत नहीं आती है। इस स्टेज में फेफड़ों की फंक्शनिंग क्षमता 80-90 प्रतिशत तक हो सकती है। वहीं, मरीज को इनहेलर का इस्तेमाल भी कभी-कभार करना पड़ता है।

माइल्ड अस्थमा ( Mild Persistent Asthma)
यह अस्थमा का दूसरा स्टेज है जिसमें मरीज को कम गम्भीर लक्षण ही दिखायी देते हैं। सप्ताह में एकाध बार लोगों को अस्थमा का अटैक आ सकते है। वहीं, बीमारी के लक्षण भी 7-10 दिनों तक बने रहते हैं और सप्ताह में एक से दो बार इनहेलर के इस्तेमाल की जरूरत पड़ सकती है।

मॉडरेट अस्थमा ( Moderate Persistent Asthma)
अस्थमा से जुड़ी इस स्थिति को बहुत गम्भीर माना जाता है। मॉडरेट अस्थमा की स्थिति में मरीज को कई दिनों तक अस्थमा के लक्षण कई दिनों तक लगातार महसूस हो सकते हैं। वहीं, इन लक्षणों के चलते लोगों को रात में ठीक तरीके से  सो पाने में परेशानी (Sleep related problems in Asthma) हो सकती है।  जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी हो सकती है। ऐसे लोगों को लगभग रोज ही इनहेलर का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

सीवियर अस्थमा ( Severe Persistent Asthma)
अस्थमा की बीमारी की सबसे सीरियर और जटिल स्थिति है जिसमें लोगों को जल्दी-जल्दी अस्थमा के अटैक(Asthma Attacks) आ सकते हैं। इससे रात में लगातार खांसी की समस्या (persistent cough in asthma) हो सकती है जिससे नींद उड़ सकती है। सीवियर अस्थमा में फेफड़ों की कार्यक्षमता 60 प्रतिशत तक रहती है। इस स्टेज के अस्थमा मरीजों को रोजाना इनहेलर इस्तेमाल करना पड़ता है।






Source:

https://www.thehealthsite.com/hindi/diseases-conditions/these-are-the-differenet-stages-of-asthma-diseases-and-its-symptoms-in-hindi-1096551/
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