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World Liver Day 2024: नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क में क्या संबंध है? एक्सपर्ट से समझिए

19 April, 2024, 05:58 AM

World Liver Day 2024: नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क में क्या संबंध है? एक्सपर्ट से समझिए

एनएएफएलडी और हृदय संबंधी जोखिम के बीच संबंध महज संयोग से परे है, जो मेटाबॉलिक संबंधी गड़बड़ी और सूजन संबंधी मार्गों के जटिल संबंध को दर्शाता है।
नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर की समस्या आज के समय में काफी कॉमन हो चुकी है और दुनियाभर के लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। एक समय तक इसे लिवर केंद्रित रोग समझा जाता था लेकिन हाल ही में हुए शोध और चर्चाओं में ये साफ हो चुका है कि एनएएफएलडी और हृदय संबंधी जोखिम के बीच एक गहरा संबंध है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कोर्डियोवैस्कुलर और नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर के बीच क्या संबंध है और ये एक दूसरे को कैसे प्रभावित करते हैं। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुंबई में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिजीत बोरसे के अनुसार नॉन अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज, लिवर में एक्स्ट्रा फैट जमने के कारण होती है। मोटापा, शरीर के इंसुलिन निर्माण में गड़बड़ होना और मेटाबॉलिक सिंड्रोम आदि इस बीमारी का कारण बनते हैं। इस बीमारी का असर सिर्फ लिवर तक ही सीमित नहीं है बल्कि ये हमारे हार्ट को भी नुकसान पहुंचा सकता है जिसके चलते खतरनाक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

एनएएफएलडी और कार्डियोवैस्कुलर के बीच संबंध
एनएएफएलडी और कार्डियोवैस्कुलर के बीच क्या संबंध है इसे समझने के लिए आज हमारे पास कई तरह के तंत्र मौजूद हैं। इंसुलिन में अस्थिरता होना एनएएफएलडी की एक बड़ी पहचान माना जाता है। इसके अलावा डिस्लिपिडेमिया, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस सहित मेटाबॉलिक संबंधी विकारों का एक समूह शुरू करता है, जो सभी एथेरोस्क्लेरोसिस में योगदान करते हैं। इसके अलावा, एनएएफएलडी बुरी तरह से आंत में फंसा हुआ फैट होता है जो आंतरिक अंगों के आसपास भी जुड़ा होता है। ये फैट आगे चलकर पूरे शरीर में सूजन और इंसुलिन में अस्थिरता लाने के लिए जिम्मेदार होता है, जिससे हृदय संबंधी जोखिम बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, एनएएफएलडी से संबंधित डिस्लिपिडेमिया, ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ाता है जो गुड कोलेस्ट्राल यानि कि लिपोप्रोटीन (एचडीएल) को कम करता है, जो एथेरोस्क्लेरोसिस को बढ़ाता है और प्लाक गठन को बढ़ावा देता है।

इसके अलावा, ताजा रिसर्च बताती हैं कि एनएएफएलडी अकेले ही पुराने जोखिम कारकों की अनुपस्थिति में भी, हृदय संबंधी परिणामों पर प्रतिकूल असर डालता है। अध्ययनों ने एनएएफएलडी रोगियों के बीच मायोकार्डियल रोधगलन, स्ट्रोक और हृदय मृत्यु की बढ़ती घटनाओं के बारे में बताया है जो इस संबंध की गंभीरता के बारे में बताते हैं। एनएएफएलडी और सीवीडी के बीच कॉमन जोखिम कारक, जैसे मोटापा, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और डिस्लिपिडेमिया, उनके पैथोफिज़ियोलॉजी को आपस में जोड़ते हैं, जिससे मेटाबॉलिक संबंधी शिथिलता और हृदय संबंधी समझौते का एक जटिल संबंध बनता है।

हालांकि, निराशा के बीच आशा की एक किरण भी है। लाइफस्टाइल में बदलाव कर जैसे सही खानपान का सेवन करना, नियमित एक्सरसाइज और वजन कम करना जैसे बदलाव कर आप एनएएफएलडी और हृदय संबंधी जोखिम दोनों को कम कर सकते हैं। फार्माकोथेरेपी के माध्यम से बेसिक मेटाबॉलिक असामान्यताओं को लक्षित करना, जैसे इंसुलिन सेंसिटाइज़र और लिपिड-कम करने वाले एजेंट, एनएएफएलडी रोगियों में हृदय संबंधी खतरों को काफी कम कर सकते हैं। इसके अलावा, नॉन अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज की जल्दी पहचान कर इसके हार्ट पर पड़ने वाले खतरों को रोका जा सकता है। एनएएफएलडी की रुटीन जांच, खासकर उस जगह में जहां जनसंख्या बहुत ज्यादा है, कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ के खतरों को रोका जा सकता है, जिससे बीमारी और उसके लक्षणों के साथ साथ मृत्यु दर को रोका जा सकता है।

निष्कर्ष में, एनएएफएलडी और हृदय संबंधी जोखिम के बीच संबंध महज संयोग से परे है, जो मेटाबॉलिक संबंधी गड़बड़ी और सूजन संबंधी मार्गों के जटिल संबंध को दर्शाता है। एनएएफएलडी को केवल लिवर विकार समझने की गलती नहीं की जानी चाहिए। बल्कि इसका शरीर के बाकी अंगों पर क्या प्रभाव पड़ता है इसकी पूरी जानकारी होना भी आवश्यक है। क्योंकि यह हृदय संबंधी रोकथाम और प्रबंधन के प्रति हमारे दृष्टिकोण में एक मत्वपूर्ण बदलाव लाता है। एनएएफएलडी को व्यापक रूप से संबोधित करके, हमारे पास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ भविष्य की शुरुआत करते हुए, हृदय संबंधी बीमारी और मृत्यु दर को रोकने का अवसर है।




Source:

https://www.thehealthsite.com/hindi/diseases-conditions/what-is-the-relationship-between-non-alcoholic-fatty-liver-disease-and-cardiovascular-risk-in-hindi-1084037/
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