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11 April, 2024, 12:45 PM
World Parkinson's Day 2024: हाथ-पैर कांपने के साथ बोलने में होती है परेशानी? कहीं ये पार्किंसन तो नहीं
दुनियाभर में हर साल 11 अप्रैल को World Parkinson Day मनाया जाता है, ऐसे में इस रोग के लक्षणों को जानना बेहद जरूरी है.
पार्किंसन रोग एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो शारीरिक गतिशीलता और भाग दौड़ में कमी लाता है. इस रोग में हमारे हाथ या पैर की नसें, जो दिमाग तक जाकर कम्यूनिकेट करती हैं, वो काम करने में कमजोर हो जाती हैं और हमारी रोज़ की शारीरिक एक्टिविटी की क्षमता पर असर पड़ने लगता है. हर साल 11 अप्रैल को दुनिया भर में World Parkinson Day मनाया जाता है. आज के इस खास मौके पर हम डॉ. हिमांशु चंपानेरी- सीनियर कंसलटेंट- डिपार्टमेंट ऑफ़ न्यूरो साइंसेस और न्यूरोसर्जरी , मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल गुरुग्राम से जानेंगे इस बीमारी के बारे में.
डॉ. हिमांशु ने बताया कि पार्किंसंस रोग नर्वस सिस्टम के कार्य का प्रभावित करता है, जो पूरे शरीर को नियंत्रित करने में मदद करती हैं. यह रोग धीरे-धीरे न्यूरॉन्स को नष्ट करता है, जो डोपामाइन (एक हार्मोन) बनाते हैं. डोपामाइन मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों के बीच संदेशों को रिले करने में मदद करता है, ऐसे में इसकी कमी गति और समन्वय की समस्याओं का कारण बन सकती है. इसके लक्षणों में हाथ-पैरों का कांपना, स्थिरता की कमी, और मांसपेशियों में बदलाव शामिल हैं. यह रोग अधिकतर बड़े उम्र के लोगों में होता है, लेकिन कभी-कभी युवा भी प्रभावित हो सकते हैं.
पार्किंसन के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं। इस बीमारी का विकास धीरे-धीरे होता है, तो उसके लक्षण भी धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। यहां कुछ सामान्य लक्षण दिए जा रहे हैं जो शुरुआत से ही प्रकट हो सकते हैं।
लक्षण –
1. मूवमेंट में परिवर्तन होते हैं- पार्किंसन रोगा शुरुआत में, यह बहुत हल्का होता है, लेकिन धीरे-धीरे उनके हाथ या पैर कांपने लगते हैं और उंगलियां भी कांपने लगती हैं. रोगियों की चाल भी बदल जाती है, वे थोड़ा आगे झुक कर चलने लगते हैं. अक्सर हाथ और पैरों को मिलाने में मुश्किल होती है और इससे वे कोई चीज गिरा सकते हैं.
2. आवाज में बदलाव होना भी पार्किंसन के लक्षण में से एक है. कुछ लोगों की आवाज बिगड़ जाती है या वो ढंग से शब्द बोल नहीं पाते और कुछ लोगो की आवाज़ भी कापने लग जाती है.
3. इस दौरान रोगी अचानक से गिर सकता है या उनके हाथ और पैरों से उनका कंट्रोल कम हो जाता है. यह लक्षण रोगी को अपनी सामान्य गतिविधियों में परेशानी महसूस करता है और उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करता है.
4. मस्तिष्क की कमजोरी की वजह से व्यक्ति अपने कार्यों को याद नहीं रख पाता है और उन्हें इंटेलिजेंस में कमी का अनुभव होता है. इससे व्यक्ति को समस्या हो सकती है क्योंकि वह सामान्य दिनचर्या में भी परेशानी महसूस कर सकता है.
कारण-
1. . पार्किंसन रोग का एक कारण हो सकता है जीनेटिक तत्व. कुछ मामलों में, यह बीमारी खानदानी होती है, जिसका मतलब है कि किसी व्यक्ति के परिवार में पहले से ही यह रोग हो सकता है. इसका अर्थ है कि इस रोग के वायरस के लिए जीनों में खामियां होती हैं जो बचपन से ही उनके जीवन के रहते हैं.
2. पार्किंसन रोग के वातावरणीय कारकों में टॉक्सिक सबस्टांसेस ( substances)का संपर्क भी शामिल हो सकता है. जब व्यक्ति इन टॉक्सिक सबस्टांसेस ( substances) के संपर्क में आता है, तो उनके शरीर में कुछ बदलाव हो सकते हैं जो पार्किंसन जैसे रोग को उत्पन्न कर सकते हैं.
3. दूषित पानी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है जो पार्किंसन रोग का खतरा बढ़ जाता है. जब किसी क्षेत्र में पानी में निकेल, प्रोमेथीन, या अन्य टॉक्सिक एलिमेंट्स मिले होते हैं, तो वहां रहने वाले लोगों को पार्किंसन का खतरा हो सकता , इसलिए स्वच्छ और सुरक्षित पानी का सेवन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है.
4. कुछ अन्य रोग जैसे कि स्ट्रोक या इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या भी पार्किंसन का कारण बन सकती है.
ट्रीटमेंट
1. दवाओं का सेवन: डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन करें
2. थेरेपी: फिजियोथेरेपी, एक्यूपंक्चर, और भाषा थेरेपी जैसी थेरेपी की सलाह दी जाती है
3. कुछ लोगो को सर्जरी की भी सलाह दी जाती है जिसमे हाई तकनीक का इस्तेमाल होता है जब दवाइया और थेरेपी काम नहीं करती
4. जीवनशैली में बदलाव : स्वस्थ आहार, व्यायाम, और नियमित ध्यान का पालन करना
Source:
https://www.india.com/hindi-news/health/world-parkinsons-day-2024-what-is-parkinson-disease-know-the-symptoms-and-prevention-6851473/




