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क्यों बीमार हो रही हैं बच्चों की किडनियां? ये लक्षण दिखने पर तुरंत हो जाएं सतर्क

12 March, 2024, 09:18 AM

क्यों बीमार हो रही हैं बच्चों की किडनियां? ये लक्षण दिखने पर तुरंत हो जाएं सतर्क

आज के समय में बड़े तो बड़े छोटे बच्चों में भी किडनी से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं, इसके पीछे क्या कारण हैं आइए जानते हैं.
आज के समय में किडनी संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, किडनियों से संबंधित बीमारियां मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं. पिछले दो दशकों में किडनियों से संबंधित समस्याओं के मामले तेजी से बढ़े हैं. युवाओं और बच्चों में भी किडनियों की खराबी के कई मामले सामने आ रहे हैं. 2023 में कोलकाता में इंडियन सोसायटी ऑफ पीडिएट्रिक नेफोलॉजी कांफ्रेंस में यह तथ्य उभर कर आया है कि हर 10 में से 3 बच्चे वॉयडिंग डिसफंक्शन (ब्लैडर यानी पेशाब की थैली का भरना, उसमें पेशाब का संग्रह होना और उसका खाली होना) से पीड़ित हैं. ऐसे में डॉ. विकास जैन, निदेशक और यूनिट प्रमुख, यूरोलॉजी, यूरो-ऑन्कोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांटेशन विभाग, फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग ने कहा कि बच्चों में किडनियों से संबंधित बीमारियों और उन्हें स्वस्थ्य रखने के उपायों को गंभीरता से लेना जरूरी है.

स्वस्थ्य किडनियां हैं जरूरी-

डॉ. विकास जैन ने बताया कि किडनियां हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से हैं, ये रक्‍त को प्रोसेस करती हैं और यूरीन उत्‍पन्‍न करती हैं. इस तरह रक्त से दूषित पदार्थों को बाहर निकालती हैं और शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखती हैं.किडनियां यूरीन के जरिए यूरिक एसिड को बाहर निकालती हैं, इसके शरीर में जमा होने से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो जाती हैं. ये हमारी किडनियां ही हैं जो शऱीर में कैल्शियम व विटामिन-डी के स्तर को बनाए रखती हैं और रक्त दाब को सामान्य बनाए रखने का प्रयास करती हैं.

अगर किडनियों की फिल्‍टर करने की क्षमता कम हो जाए तो, शरीर में व्‍यर्थ पदार्थ खतरनाक स्‍तर तक एकत्र हो जाते हैं, और रक्‍त में रसायनों का संतुलन गड़बड़ा जाता है, जो घातक होता है. बच्चों का शरीर विकसित हो रहा होता है, ऐसे में उनके सभी अंगों और तंत्रों जिसमें किडनियां भी शामिल हैं ठीक तरह से काम करना बहुत जरूरी है.

क्यों बीमार हो रही हैं बच्चों की किडनियां?

खानपान की गलत आदतें-
आजकल के बच्चों में पैकेज फूड्स और जंक फूड्स का सेवन बहुत बढ़ गया है. इनमें कई ऐसे तत्व होते हैं जो बच्चों की किडिनियों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं.

नमकीन स्नैक्स-

छोटे-छोटे पैकेट्स में मिलने वाले नमकीन स्नैक्स में बहुत अधिक सोडियम होता है. सोडियम किडनियों से पानी को बाहर निकालता है, जिससे किडनियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे किडनियां कमजोर हो जाती हैं और उनके बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है.

जंक फूड्स-

जंक फूड्स में अक्सर बहुत अधिक सोडियम, चीनी, एमएसजी होते हैं. ये सभी चीजें बच्चों की किडनियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. एमएसजी जैसे अजिनोमोटो चायनीज़ फूड्स में बहुत इस्तेमाल होता है और आजकल के बच्चों को चायनीज़ खाना बहुत पसंद है. अजिनोमोटो मोनोसोडियम ग्लुटामेट होता है. इनके सेवन से पानी का इनटेक बढ़ जाता है जिससे यूरीन अधिक मात्रा में पास करनी पड़ती है. इससे किडनियों पर दबाव बढ़ता है और उनकी सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होती है.

डिहाइड्रेशन-

बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी और दूसरे तरल पदार्थों की जरूरत होती है. अक्सर पढ़ाई के बोझ या खेलने में व्यस्त होने के कारण बच्चे पानी पीना भूल जाते हैं. इससे शरीर में डिहाइड्रेशन बढ़ता है जिससे किडनियों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है.

मोटापा-

हमारे देश के बच्चों में बढ़ता मोटापा एक गंभीर समस्या है. भारत के लगभग 15 प्रतिशत बच्चों का वजन सामान्य से अधिक है या वो मोटापे के शिकार हैं. वर्तमान में हमारे यहां के 1 करोड़ 44 लाख बच्चे मोटापे का शिकार हैं. 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1 करोड़ 70 लाख तक हो जाएगी. मोटापे के कारण क्रॉनिक किडनी डिसीज सहित किडनी से संबंधित दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

अनुवांशिक कारण-

अनुवांशिक कारण भी बच्चों की किडनियों को बीमार बनाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जिनके बच्चों के परिवारों में किडनियों से संबंधित समस्याओं के मामले होते हैं उनके लिए खतरा बढ़ जाता है. इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के अनुसार विश्व की 10 प्रतिशत जनसंख्या किडनियों से संबंधित मामूली या गंभीर समस्याओं से जूझ रही है. ऐसे में बच्चों के लिए भी रिस्क बढ़ रहा है.

इन लक्षणों को गंभीरता से लें माता-पिता-

बच्चे नासमझ होते हैं, इसलिए माता-पिता को उनके स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए. अगर निम्न लक्षण दिखें तो माता-पिता को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए:

• अगर बच्चे का शारीरिक विकास अपने हमउम्र बच्चों के समान नहीं है
• बच्चा बहुत दुबला-पतला है, उसका वज़न सामान्य से कम है
• सुबह उठने पर चेहरे और पैरों पर सूजन दिखाई देना
• पेशाब में जलन या पेशाब का रंग बदल जाना
• पेशाब करने में अधिक समय लगाना
• पेट में दर्द
• भूख न लगना
• थकान

किडनियों को स्वस्थ्य रखने की टिप्स

माता-पिता को चाहिए की वो बच्चों को अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करें, इससे न केवल उनकी किडनियां ठीक तरह से काम करेंगी बल्कि उनका समग्र स्वास्थ्य बेहतर बनेगा.
• उन्हें अनुशासित जीवनशैली का पालन करने के लिए प्रेरित करें; नियत समय पर सोना, जागना और खाना
• बच्चों को घर का बना सादा और पोषक खाना दें, उन्हें प्रोसेस्ड फूड्स, फिज्जी ड्रिंक्स और जंक फूड्स से दूर रखें
• घर की चहार दीवारी में बंद न रखें, बाहर निकलकर दोस्तों के साथ खेलने दें
• उनके वज़न पर नज़र रखें, हम उम्र बच्चों से वज़न कम या ज्यादा होने को गंभीरता से लें
• पर्याप्त मात्रा में पानी और दूसरे तरल पदार्थों का सेवन करने के लिए कहें




















Source:

https://www.india.com/hindi-news/health/why-are-childrens-kidneys-getting-sick-be-alert-immediately-if-these-symptoms-appear-6781529/
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