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प्लास्टिक की बोतल के बढ़ा सकती हैं ये परेशानियां, हो जाएं सावधान, वरना बाद में पड़ सकता है पछताना

27 February, 2024, 07:22 AM

प्लास्टिक की बोतल के बढ़ा सकती हैं ये परेशानियां, हो जाएं सावधान, वरना बाद में पड़ सकता है पछताना

डिस्पोजेबल या अन्य प्लास्टिक की बोतल केमिकल पोल्शयून और टॉक्सिसिटी की वजह बन सकती है. सूरज की रोशनी और गर्मी में प्लास्टिक से पानी में टॉक्सिक केमिकल निकलने का खतरा रहता है.
Plastic Bottle Health Risks: अगर आप भी प्लास्टिक की बोलत में लगातार पानी पीते हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. यह हमारी सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. इससे बांझपन और थाइरॉइड की समस्या गंभीर रूप ले सकती है. दरअसल, प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं होती है. यही कारण है कि वातारवण को भी इससे नुकसान होता है. प्लास्टिक के टॉक्सिक प्रभाव और केमिकल की वजह से इसमें पानी पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से कौन-कौन से खतरे हैं...
 
प्लास्टिक की बोलत में पानी पीना क्यों खतरनाक
डिस्पोजेबल या अन्य प्लास्टिक की बोतल केमिकल पोल्शयून और टॉक्सिसिटी की वजह बन सकती है. सूरज की रोशनी और गर्मी में प्लास्टिक से पानी में टॉक्सिक केमिकल निकलने का खतरा रहता है. जनवरी 2024 में प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में एक नई स्टडी पब्लिश की गई. जिसमें पाया गया कि औसतन एक लीटर बोतलबंद पानी में प्लास्टिक के करीब 240,000 छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं. इनसे करीब 90 प्रतिशत प्लास्टिक के टुकड़े नैनोप्लास्टिक के हो सकते हैं. स्टडी में बताया गया कि इन कणों की मात्रा पहले के अध्ययनों की तुलना में 10-100 गुना ज्यादा हैं, जो चिंता का विषय हैं.
 
प्लास्टिक की बोतल में खतरनाक केमिकल
साल 2022 के जर्नल ऑफ हैजर्डस मटेरियल्स की एक स्टडी में बताया गया कि री-यूज की गई प्लास्टिक की बोतलों में नल का पानी रखकर उसकी जांच की गई. जिसमें अत्यधिक मात्रा में केमिकल ऑब्जेक्ट्स पाए गए, जो हमारी सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं. इसके अलावा इसकी पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले बिस्फेनॉल-ए या बीपीए पर बैन के बावजूद इनमें मौजूद होता है, जो सेहत के लिए जहर से कम नहीं है.
 
प्लास्टिक की बोलत में पानी पीने से क्या खतरा
प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से बिस्फेनॉल ए और फ़ेथलेट्स दो एंडोक्राइन ग्लैंड को बुरी तरह प्रभावित करने वाले केमिकल हैं. लगातार इनके इस्तेमाल से रीप्रोडक्टिविटी सिस्टम प्रभावित हो सकता है. जिससे फर्टिलिटी की समस्या बढ़ सकती है यानी बांझपन की शिकाय भी हो सकती है. वहीं, इससे थायरॉयड फ़ंक्शन भी बदल सकते हैं. बच्चे के विकास में भी ये बाधक होते हैं. अगर इन बोतलों को ज्यादा देर तक गर्म वाली जगहों पर छोड़ दिया जाता है तो ये हेल्थ के लिए ज्यादा खतरनाक हो जाती हैं.

Source:

https://www.abplive.com/lifestyle/health/health-tips-avoid-drinking-water-in-plastic-bottles-know-risks-in-hindi-2622837
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