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1 June, 2024, 08:15 AM
Myopic: खतरे में बच्चों की आंखें! स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से तेजी से बढ़ रहा मायोपिया
भारत में बच्चों की आंखों के लिए खतरे की घंटी बज उठी है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भारत में स्कूल जाने वाले 13% से अधिक बच्चे मायोपिया से ग्रस्त हैं.
भारत में बच्चों की आंखों के लिए खतरे की घंटी बज उठी है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भारत में स्कूल जाने वाले 13% से अधिक बच्चे मायोपिया (दूर की चीजें देखने में परेशानी) से ग्रस्त हैं. यह आंकड़ा पिछले एक दशक में दोगुना से भी ज्यादा हो गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका मुख्य कारण बच्चों द्वारा स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बढ़ता हुआ इस्तेमाल है.
मायोपिया एक ऐसी समस्या है, जिसमें दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं, जबकि पास की वस्तुएं साफ नजर आती हैं. यह आमतौर पर बचपन में विकसित होती है और उम्र के साथ बढ़ सकती है. गंभीर मायोपिया रेटिना संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है.
अध्ययन के मुख्य शोधकर्ताओं का मानना है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम और कम उम्र में बच्चों का इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संपर्क में आना मायोपिया का एक प्रमुख रिस्क फैक्टर है. उन्होंने यह भी बताया कि शहरी क्षेत्रों (8.5%) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों (6.1%) में बच्चों में मायोपिया की समस्या कम देखी गई है. इसका कारण माना जा सकता है कि शहरी क्षेत्रों में बच्चों के पास स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक आसान पहुंच होती है.
उपाय क्या?
इस समस्या से निपटने के लिए एक्सपर्ट बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करने की सलाह देते हैं. साथ ही बच्चों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए कि वे बाहर खेलने में अधिक समय बिताएं. सूर्य की रोशनी मायोपिया को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है. माता-पिता को भी बच्चों की आंखों की सेहत पर ध्यान देना चाहिए और नियमित रूप से उनका आई टेस्ट करवाना चाहिए.
तेजी से बढ़ रहे मायोपिया के मामले
भारत ही नहीं, दुनियाभर में मायोपिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि 2050 तक दुनिया की आधी से अधिक आबादी को मायोपिया की समस्या हो सकती है. यह चिंता का विषय है कि भारत जैसे विकासशील देश में (जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है) वहां बढ़ते मायोपिया के मामलों से हेल्थ सिस्टम पर बोझ बढ़ सकता है. इसलिए, माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के डिजिटल डिवाइसों के उपयोग को विनियमित करने और उनकी आंखों की सेहत के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है.
Source:
https://zeenews.india.com/hindi/health/smartphones-and-gadgets-are-making-indian-kids-myopic/2270768




